आंगनबाड़ी केंद्रों में हर दो महीने पर प्रबंधन समिति की बैठक अनिवार्य
पटना: राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों के बेहतर संचालन और बच्चों व महिलाओं को मिलने वाले पोषाहार की गुणवत्ता की निगरानी के लिए समाज कल्याण विभाग ने अहम फैसला लिया है। अब सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगनबाड़ी विकास समिति (प्रबंधन समिति) की बैठक करना अनिवार्य होगा। बैठक कम से कम प्रत्येक दो महीने में एक बार आयोजित की जाएगी। इस संबंध में समाज कल्याण विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिया है।
बैठक में आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, संबंधित वार्ड सदस्य और सभी लाभार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। बैठक के माध्यम से केंद्र के कामकाज की समीक्षा के साथ स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में पारदर्शिता लाने और बच्चों तथा महिलाओं को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर करना है।
पोषाहार की गुणवत्ता की होगी समीक्षा
बैठक में बच्चों के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को उपलब्ध कराये जाने वाले टेक होम राशन और गर्म पके भोजन की गुणवत्ता की समीक्षा की जाएगी। पोषाहार समय पर और निर्धारित मानकों के अनुरूप लाभार्थियों को मिल रहा है या नहीं, इसकी भी निगरानी की जाएगी।
इसके अलावा केंद्र में बच्चों की दैनिक उपस्थिति, टीकाकरण की स्थिति और नियमित स्वास्थ्य जांच से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा होगी। बच्चों के लिए उपलब्ध पेयजल, शौचालय, बिजली और साफ-सफाई की व्यवस्था पर भी चर्चा की जाएगी। जरूरत के अनुसार सुविधाओं में सुधार के लिए निर्णय लिये जाएंगे।
विकास कोष के खर्च पर भी नजर
आंगनबाड़ी केंद्र के विकास कोष से होने वाले खर्च और वित्तीय लेन-देन को भी समिति के समक्ष रखा जाएगा। विकास कोष के उपयोग का अनुमोदन समिति द्वारा किया जाएगा, जिससे खर्च में पारदर्शिता बनी रहे।
बैठक की अध्यक्षता स्थानीय वार्ड सदस्य या नामित अध्यक्ष करेंगे, जबकि आंगनबाड़ी सेविका समिति की सचिव के रूप में बैठक की पूरी कार्यवाही संचालित करेंगी। बैठक में लिये गये निर्णयों और चर्चा का विवरण निर्णय रजिस्टर में दर्ज करना होगा।
बैठक समाप्त होने के बाद इसकी रिपोर्ट संबंधित बाल
विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) कार्यालय को भेजी जाएगी। विभाग के निर्देश के बाद अब आंगनबाड़ी केंद्रों के स्तर पर नियमित बैठकों के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन, पोषाहार, स्वास्थ्य सुविधाओं और केंद्र की व्यवस्थाओं की निगरानी और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।
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