'भोजपुरी के शेक्सपियर' भिखारी ठाकुर के प्रपौत्र की राजभवन से सेवा समाप्त, जानिए पूरा मामला
छपरा/सारण: भोजपुरी के महान लोक कलाकार और 'भोजपुरी के शेक्सपियर' के नाम से प्रसिद्ध भिखारी ठाकुर के प्रपौत्र सुशील कुमार ठाकुर की बिहार राजभवन में हुई नियुक्ति कुछ ही महीनों बाद समाप्त कर दी गई। राजभवन सचिवालय के अनुसार, स्टेनोग्राफर पद के लिए जरूरी तकनीकी दक्षता और निर्धारित दक्षता परीक्षा में शामिल नहीं होने के कारण यह कार्रवाई की गई।
राज्यपाल की घोषणा के बाद मिली थी नौकरी
मामले की शुरुआत 18 दिसंबर 2025 से हुई, जब तत्कालीन राज्यपाल डॉ. आरिफ मोहम्मद खान ने सारण के डोरीगंज स्थित कुतुबपुर दियारा पहुंचकर भिखारी ठाकुर के परिजनों से मुलाकात की थी। भिखारी ठाकुर के योगदान को सम्मान देने और उनके परिवार को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उनके प्रपौत्र सुशील कुमार ठाकुर को राजभवन में नौकरी देने की घोषणा की गई थी।
इसके बाद 23 जनवरी 2026 को सुशील कुमार ठाकुर की राजभवन सचिवालय में आशुलिपिक (स्टेनोग्राफर) पद पर परिवीक्षा अवधि में नियुक्ति की गई।
स्टेनोग्राफी और टाइपिंग की दक्षता पर उठे सवाल
नियुक्ति के बाद काम के दौरान अधिकारियों के साथ समन्वय में सुशील की तकनीकी दक्षता को लेकर सवाल सामने आए। राजभवन के अनुसार, स्टेनोग्राफर पद के लिए शॉर्टहैंड के साथ हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग का निर्धारित ज्ञान और गति जरूरी है।
राजभवन की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि सुशील के पास अपेक्षित स्टेनोग्राफी ज्ञान और टाइपिंग स्पीड नहीं पाई गई, जिससे उनके काम को लेकर कठिनाई सामने आई।
दो बार आयोजित हुई दक्षता परीक्षा, दोनों बार रहे अनुपस्थित
कार्यकुशलता का आकलन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति के निर्देश पर 22 जुलाई 2026 को दक्षता परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन सुशील इसमें शामिल नहीं हुए।
इसके बाद राजभवन ने उन्हें एक और अवसर देते हुए 6 अगस्त 2026 को परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया। हालांकि, वह इस परीक्षा में भी उपस्थित नहीं हुए और परीक्षा से छूट की मांग करते रहे।
राजभवन ने इसे विभागीय निर्देशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता माना।
प्रोबेशन नियमों के आधार पर हुई सेवा समाप्ति
राजभवन के निष्कासन आदेश में बिहार सरकारी सेवक परिवीक्षा अवधि नियम-2024 का उल्लेख किया गया है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के पुरुषोत्तम लाल ढींगरा बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि परिवीक्षा अवधि में यदि कर्मचारी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाता है या वह निर्धारित निर्देशों का पालन नहीं करता, तो नियमानुसार उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।
इन्हीं आधारों पर सक्षम प्राधिकारी ने सुशील कुमार ठाकुर की सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया।
कौन थे भिखारी ठाकुर?
भिखारी ठाकुर भोजपुरी भाषा और लोक संस्कृति के प्रमुख पुरोधाओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने नाटकों और रचनाओं के जरिए समाज की कुरीतियों, गरीबी, पलायन, महिला उत्पीड़न और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
उनकी चर्चित कृतियों में 'बिदेसिया', 'गबरघिचोर', 'बेटी बेचवा' और 'विधवा विलाप' शामिल हैं। भोजपुरी लोक रंगमंच और साहित्य में उनके योगदान के कारण उन्हें व्यापक रूप से 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा जाता है।
सुशील कुमार ठाकुर की नियुक्ति को भिखारी ठाकुर की विरासत के सम्मान से जोड़कर देखा गया था, लेकिन तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक नियमों के आधार पर कुछ महीनों के भीतर ही उनकी राजभवन सेवा समाप्त हो गई।
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