UCC पर बिहार में सियासी बवाल, RJD के भाई वीरेंद्र का JDU को खुला ऑफर, बोले- साथ आएं तो बना लेंगे सरकार
भाई वीरेंद्र का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब UCC को लेकर बिहार एनडीए में अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं. भाजपा की ओर से UCC को लेकर जोर दिया जा रहा है, जबकि जदयू की ओर से इस संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक चर्चा की जरूरत बतायी जा रही है. जदयू के नेताओं की ओर से बिहार में UCC लागू करने को लेकर विरोध के स्वर भी सामने आए हैं.
भाई वीरेंद्र ने JDU को दिया खुला ऑफर
राजद नेता भाई वीरेंद्र ने जदयू को सीधे तौर पर राजद के साथ आने का ऑफर दिया है. उन्होंने कहा कि अगर जदयू साथ आता है तो सरकार बनाने की स्थिति तैयार हो सकती है. उनके इस बयान को भाजपा-जदयू गठबंधन में दबाव बढ़ाने की राजद की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
राजद नेता के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या UCC के मुद्दे पर जदयू और भाजपा के बीच बढ़ती दूरी का फायदा विपक्ष उठाने की कोशिश कर रहा है.
UCC को लेकर NDA में बढ़ी बेचैनी
UCC को लेकर भाजपा और जदयू के रुख में अंतर सामने आने के बाद बिहार की राजनीति गरमायी हुई है. जदयू की ओर से इस तरह के संवेदनशील कानून पर व्यापक विचार-विमर्श की बात कही जा रही है. वहीं, राजद लगातार इस मुद्दे को लेकर एनडीए पर निशाना साध रहा है.
राजद का कहना है कि बिहार में किसी भी बड़े और संवेदनशील फैसले से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लिया जाना चाहिए. इसी राजनीतिक माहौल में भाई वीरेंद्र का जदयू को सरकार बनाने का ऑफर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
18 सितंबर की JDU बैठक पर टिकी नजर
18 सितंबर को पटना में जदयू की अहम बैठक प्रस्तावित है. UCC विवाद और राजद के खुले ऑफर के बीच इस बैठक पर राजनीतिक दलों की नजरें टिक गयी हैं. बैठक में पार्टी की आगे की राजनीतिक रणनीति, गठबंधन से जुड़े मुद्दों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा होने की संभावना है.
हालांकि, जदयू के एनडीए से अलग होने या राजद के साथ सरकार बनाने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है. ऐसे में भाई वीरेंद्र के बयान को अभी राजद की राजनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है.
क्या बिहार में बदलेगा सियासी समीकरण?
भाई वीरेंद्र के खुले ऑफर के बाद बिहार में एक बार फिर पुराने राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गयी है. राजद और जदयू पहले भी साथ मिलकर सरकार चला चुके हैं. ऐसे में विपक्ष की ओर से जदयू को दिया गया यह ऑफर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अब सबकी नजर 18 सितंबर की जदयू बैठक और उसके बाद पार्टी नेतृत्व के रुख पर है. यदि UCC समेत अन्य मुद्दों पर भाजपा और जदयू के बीच मतभेद बढ़ते हैं, तो आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
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