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मेरठ में दिग्विजय भाटी पिटाई मामले में नया मोड़, शपथपत्र देकर कार्रवाई से पीछे हटे

मेरठ में दिग्विजय भाटी पिटाई मामले में नया मोड़, शपथपत्र देकर कार्रवाई से पीछे हटे

Digvijay Bhati Case: मेरठ में किसान यूनियन बीआर आंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय भाटी और जिलाध्यक्ष मोहित जाटव की पुलिस कार्यालय में कथित पिटाई का मामला अब नया मोड़ ले चुका है. 19 अगस्त को सामने आए इस प्रकरण में दोनों ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और अन्य पुलिसकर्मियों पर मारपीट के आरोप लगाए थे. मामले की जांच डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह को सौंपी गई थी. अब दिग्विजय भाटी की ओर से जांच अधिकारी के समक्ष शपथपत्र दाखिल कर आगे किसी तरह की कार्रवाई नहीं चाहने की बात सामने आई है.

डीआईजी के सामने दिग्विजय ने दाखिल किया शपथपत्र

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक दिग्विजय भाटी ने जांच अधिकारी डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह के समक्ष शपथपत्र दाखिल किया है. इसमें उन्होंने मामले में आगे कानूनी कार्रवाई नहीं चाहने की बात कही है. कुछ रिपोर्टों में इसे दोनों पक्षों के बीच समझौते के तौर पर बताया गया है. हालांकि समझौते की पूरी शर्तों और प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित है.

मोहित जाटव ने खुद को समझौते से अलग बताया

मामले में दिग्विजय भाटी के साथ रहे मोहित जाटव ने समझौते से खुद को अलग बताया है. रिपोर्टों के अनुसार उनका कहना है कि वह अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे. मोहित ने 17 सितंबर को संगठन के सभी पदों से इस्तीफा देने की बात भी सामने आई है.

संगठन में नाराजगी, कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे का किया ऐलान

दिग्विजय भाटी के शपथपत्र की जानकारी सामने आने के बाद संगठन के कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में नाराजगी की बात सामने आई है. सोशल मीडिया पर कई कार्यकर्ताओं की ओर से इस्तीफे की घोषणा किए जाने की रिपोर्ट है. हालांकि कितने लोगों ने औपचारिक रूप से इस्तीफा दिया है, इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है.

कथित लेनदेन के वीडियो और ऑडियो की चर्चा

समझौते को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आने की बात कही जा रही है. इनमें कथित तौर पर पैसों के लेनदेन से संबंधित बातचीत होने के दावे भी किए जा रहे हैं. हालांकि इन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उनमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए इन्हें फिलहाल आरोप या चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है.

19 अगस्त को शुरू हुआ था पूरा विवाद

19 अगस्त को दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव मेरठ के तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने पुलिस कार्यालय पहुंचे थे. दोनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस कार्यालय और बाद में एसओजी कार्यालय में उनके साथ मारपीट की गई. पुलिस की ओर से उस समय आरोपों का खंडन किया गया था और चोटों को स्कूटी फिसलने से जोड़ने का दावा भी सामने आया था.

मामला बढ़ने के बाद जांच डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह को सौंपी गई. जांच के दौरान सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया था. बाद में अखिलेश गौड़ के निलंबन की कार्रवाई भी सामने आई. तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय को भी मेरठ से हटा दिया गया था.

अब जांच की दिशा पर नजर

दिग्विजय भाटी के शपथपत्र और मोहित जाटव के समझौते से अलग रहने के बाद इस मामले की जांच की दिशा महत्वपूर्ण हो गई है. वहीं, कथित वीडियो, ऑडियो और लेनदेन से जुड़े दावों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी. फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि प्रकरण में दोनों प्रमुख शिकायतकर्ताओं की स्थिति अलग-अलग हो गई है.

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