कानपुर झकरकटी बस अड्डे का होगा कायाकल्प, 300 मीटर फ्लाईओवर के लिए मिट्टी की जांच शुरू
कानपुर: झकरकटी बस अड्डा (शहीद मेजर सलमान खान) के पुनर्विकास की तैयारियां अब जमीनी स्तर पर तेज हो गई हैं. प्रस्तावित पांच मंजिला आधुनिक बस टर्मिनल के निर्माण से पहले मिट्टी की भार वहन क्षमता की जांच का काम किया जा चुका है. अब 300 मीटर लंबे प्रस्तावित फ्लाईओवर के निर्माण के लिए भी मिट्टी की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है.
छह स्थानों पर 40 फीट गहराई से लिए जा रहे नमूने
फ्लाईओवर के निर्माण के लिए बस अड्डा परिसर में छह स्थान चिह्नित किए गए हैं. इन जगहों पर हाइड्रोलिक बोरिंग मशीनों की मदद से करीब 40 फीट गहराई तक मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं. एक बोर से सैंपल लेने में करीब दो दिन का समय लग रहा है.
फ्लाईओवर करीब 10 मीटर चौड़ा होगा और इसके लिए छह पिलर बनाए जाने प्रस्तावित हैं. बसें बस अड्डे से निकलकर इसी फ्लाईओवर के रास्ते आगे अपने गंतव्य की ओर रवाना होंगी. प्रस्तावित फ्लाईओवर को बस अड्डे के अंदर से रेलवे ओवरब्रिज से जोड़ने की योजना है.
पहले पांच मंजिला इमारत के लिए हुई थी जांच
बस अड्डे की प्रस्तावित पांच मंजिला इमारत के निर्माण के लिए पहले ही सात स्थानों पर मिट्टी की जांच कराई जा चुकी है. इन स्थानों से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट भी आ चुकी है. अब फ्लाईओवर के लिए अलग-अलग स्थानों से मिट्टी के नमूने लेकर उसकी तकनीकी क्षमता का आकलन किया जा रहा है.
इस जांच का जिम्मा दिल्ली की कंपनी आइजीएस (इंडियन जियोटेक्निकल सर्विसेज) को दिया गया है. कंपनी की टीम मिट्टी की संरचना और उसकी भार वहन क्षमता समेत अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है.
मिट्टी की संरचना और भूमिगत जल स्तर की भी जांच
ठेकेदार कंपनी सीगल के अधिकारियों के अनुसार, पांच मंजिला व्यावसायिक और यात्री परिसर की मजबूती के लिए जमीन की लोड-बेयरिंग क्षमता का पता लगाना जरूरी है. इसी उद्देश्य से जमीन के नीचे तक बोरिंग कर मिट्टी के अलग-अलग स्तर, उसकी संरचना, नमी और भूमिगत जल स्तर का अध्ययन किया जा रहा है.
मेट्रो स्टेशन के समीप वाले हिस्से और बस अड्डा परिसर में मौजूद झील के अंदर की मिट्टी की भी जांच पूरी किए जाने की जानकारी दी गई है. इसका उद्देश्य निर्माण के दौरान और भविष्य में संभावित तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए जमीन की स्थिति का पहले से आकलन करना है.
जांच रिपोर्ट के बाद तैयार होगा फ्लाईओवर का डिजाइन
कंपनी के सुपरवाइजर मोहम्मद रजा के मुताबिक, मिट्टी के नमूनों की जांच के बाद प्रयोगशाला से रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है. रिपोर्ट आने के बाद फ्लाईओवर का डिजाइन तैयार किया जाएगा. संबंधित स्तर से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा.
PPP मॉडल पर हाईटेक टर्मिनल में बदलेगा बस अड्डा
झकरकटी बस अड्डे को सार्वजनिक निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के तहत आधुनिक और हाईटेक टर्मिनल के रूप में विकसित करने की योजना है. परियोजना के तहत पांच मंजिला कमर्शियल और पैसेंजर टर्मिनल बनाया जाना प्रस्तावित है.
| पुनर्विकसित बस अड्डे की स्थिति | विवरण |
|---|---|
| कुल अनुमानित लागत | 166 करोड़ रुपये |
| स्वीकृत राशि | 143 करोड़ रुपये |
| मॉडल | PPP (ट्रिपल-पी) मॉडल |
| प्रस्तावित संरचना | पांच मंजिला आधुनिक कमर्शियल एवं पैसेंजर टर्मिनल |
| फ्लाईओवर की लंबाई | करीब 300 मीटर |
| फ्लाईओवर की चौड़ाई | करीब 10 मीटर |
| प्रस्तावित पिलर | छह |

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