राजू कुमार सिंह की विधायकी पर फिर सवाल, दीपंकर भट्टाचार्य ने विधानसभा अध्यक्ष से मांगा जवाब
Raju Singh MLA: मुजफ्फरपुर के साहेबगंज से भाजपा विधायक रहे राजू कुमार सिंह की विधानसभा सदस्यता का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है. भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने उनकी सदस्यता को लेकर बिहार विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा है कि अदालत से दोषसिद्धि और चार साल की सजा के बाद अब तक सदस्यता को लेकर क्या निर्णय लिया गया है.
राजू कुमार सिंह को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला की मौत से जुड़े 2018 के जश्न में फायरिंग मामले में दोषी ठहराया था. रिकॉर्ड के अनुसार दोषसिद्धि का आदेश 6 जून 2026 को हुआ था और 4 जुलाई को उन्हें चार साल की सजा सुनाई गयी. कोर्ट ने 25 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था.
दिल्ली हाईकोर्ट से भी नहीं मिली दोषसिद्धि पर रोक
राजू कुमार सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी. 29 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति मनोज जैन की अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोषसिद्धि पर रोक असाधारण परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए. अदालत ने मामले के तथ्यों और रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. हालांकि, 27 जुलाई 2026 के आदेश के जरिए उनकी सजा पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी थी. उनकी मुख्य अपील पर आगे सुनवाई होनी है.
चार साल की सजा के बाद सदस्यता पर कानूनी सवाल
दिल्ली हाईकोर्ट के 29 सितंबर के आदेश में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) का भी उल्लेख है. इस प्रावधान के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा पाने वाला व्यक्ति दोषसिद्धि की तारीख से अयोग्यता के दायरे में आता है और रिहाई के बाद भी छह साल तक अयोग्यता जारी रहती है.
राजू कुमार सिंह की ओर से अदालत में यह दलील दी गयी थी कि यदि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगती है तो उन्हें विधानसभा सदस्यता के साथ भविष्य में चुनाव लड़ने को लेकर भी अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है. अदालत ने फिलहाल दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.
दीपंकर भट्टाचार्य ने उठाया विधानसभा अध्यक्ष पर सवाल
भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने रविवार को जारी बयान में कहा कि राजू कुमार सिंह के मामले में विधानसभा स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस मामले में निर्णय लेने में देरी क्यों हो रही है.
उन्होंने इस मामले की तुलना अपनी पार्टी के तत्कालीन विधायक मनोज मंजिल से भी की है.
मनोज मंजिल मामले में क्या हुआ था
अगिआंव से भाकपा-माले विधायक मनोज मंजिल को हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद बिहार विधानसभा सचिवालय ने 16 फरवरी 2024 को उनकी सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी की थी. उनकी अयोग्यता के बाद अगिआंव विधानसभा सीट रिक्त हुई और निर्वाचन आयोग ने 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ वहां उपचुनाव कराने की घोषणा की थी.
दीपंकर भट्टाचार्य ने इसी उदाहरण का हवाला देते हुए राजू कुमार सिंह के मामले में विधानसभा की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाया है.
अब आगे क्या होगा
राजू कुमार सिंह की दोषसिद्धि पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक नहीं लगाई है, जबकि उनकी सजा पर रोक पहले ही दी जा चुकी है. हाईकोर्ट में उनकी मुख्य अपील अभी लंबित है. ऐसे में उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर बिहार विधानसभा स्तर पर होने वाली कार्रवाई और अदालत में चल रही अपील दोनों महत्वपूर्ण बने हुए हैं.
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