सूरजभान सिंह की तबीयत बिगड़ी, चेन्नई में भर्ती: बाहुबली से सांसद बनने तक का सफर, श्रीप्रकाश शुक्ला और AK-47 वाला चर्चित किस्सा
पटना: बिहार के चर्चित बाहुबली नेता और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए चेन्नई ले जाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ दिन पहले सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद इलाज के लिए पहले दिल्ली ले जाया गया और हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर चेन्नई रेफर किया गया। फिलहाल उनके स्वास्थ्य को लेकर परिवार और समर्थकों की चिंता बढ़ी हुई है।
सूरजभान सिंह के स्वास्थ्य की खबर सामने आते ही एक बार फिर उनके लंबे और विवादों से भरे राजनीतिक सफर की चर्चा तेज हो गई है। मोकामा के बाहुबली से विधायक और फिर सांसद बनने तक की उनकी कहानी बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित अध्यायों में शामिल रही है।
पिता चाहते थे बेटा फौजी बने
सूरजभान सिंह का जन्म 5 मार्च 1965 को मोकामा क्षेत्र में हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि लंबी कद-काठी वाला बेटा सेना या सुरक्षा बलों में जाए, लेकिन सूरजभान का जीवन जल्द ही एक अलग दिशा में चला गया। 1980 के दशक से उनका नाम आपराधिक मामलों और क्षेत्रीय दबदबे की राजनीति में आने लगा।
अपराध की दुनिया में बढ़ता दबदबा
मोकामा और आसपास के इलाकों में सूरजभान सिंह का नाम धीरे-धीरे प्रभावशाली बाहुबली नेताओं में गिना जाने लगा। उनके खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण समेत कई मामलों में आरोप लगे और उनका नाम बिहार की कई चर्चित आपराधिक घटनाओं से जुड़ता रहा। हालांकि विभिन्न मामलों की कानूनी स्थिति अलग-अलग रही है और समय के साथ कुछ मामलों में उन्हें राहत भी मिली।
श्रीप्रकाश शुक्ला से कैसे जुड़ा नाम?
सूरजभान सिंह की कहानी का सबसे चर्चित अध्याय उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला से उनके कथित संबंधों को लेकर रहा है। पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय ने एक इंटरव्यू में दोनों के संबंधों और पूर्वांचल में रेलवे ठेकों को लेकर चल रहे संघर्ष का जिक्र किया था।
पूर्व आईपीएस के मुताबिक, श्रीप्रकाश शुक्ला ने सूरजभान सिंह से AK-47 मांगी थी। इस पर सूरजभान ने कथित तौर पर कहा था कि वीरेंद्र प्रताप शाही को मारने पर उसे एक नहीं, बल्कि दो AK-47 दिए जाएंगे। इस दावे के अनुसार बाद में शाही पर हमला हुआ, जिसमें उनका गनर मारा गया और शाही घायल हुए, लेकिन उनकी जान बच गई। यह विवरण पूर्व आईपीएस अधिकारी के बयान पर आधारित है।
मोकामा में हमला और पैर में गोली
सूरजभान सिंह खुद भी कई बार हमलों का निशाना बने। 1990 के दशक में उन पर हुए एक बड़े हमले और गोली लगने की घटना की चर्चा लंबे समय तक होती रही। इसके बाद इलाज और पुलिस कार्रवाई के दौरान उनका नाम लगातार सुर्खियों में बना रहा।
जेल से चुनाव और बड़ी जीत
सूरजभान सिंह के राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा मोड़ साल 2000 का बिहार विधानसभा चुनाव माना जाता है। उस समय वह जेल में थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मोकामा विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा।
नतीजा आने पर सूरजभान सिंह ने बड़ी जीत दर्ज की और विधायक बन गए। जेल में रहते हुए चुनाव जीतने के बाद उनकी राजनीतिक ताकत और पहचान दोनों तेजी से बढ़ीं।
विधायक से सांसद तक पहुंचे सूरजभान
विधायक बनने के बाद सूरजभान सिंह ने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। 2004 में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता और सांसद बने। इस तरह मोकामा के बाहुबली के रूप में चर्चित एक नेता ने विधानसभा के बाद संसद तक का सफर तय किया।
बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में भी आया नाम
पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में भी सूरजभान सिंह का नाम आरोपी के रूप में सामने आया था। हालांकि बाद के कानूनी घटनाक्रम में इस मामले में उन्हें राहत मिली और 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव के आधार पर उन्हें बरी कर दिया।
परिवार भी राजनीति में सक्रिय
सूरजभान सिंह के बाद उनका परिवार भी बिहार की राजनीति में सक्रिय रहा। उनकी पत्नी वीणा देवी सांसद रह चुकी हैं, जबकि उनके भाई चंदन सिंह भी लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच चुके हैं। इस तरह सूरजभान परिवार की राजनीतिक मौजूदगी बिहार की राजनीति में लगातार बनी रही।
अब फिर चर्चा में सूरजभान सिंह
चेन्नई में इलाज के लिए भर्ती होने की खबर के बाद सूरजभान सिंह एक बार फिर बिहार की सियासत में चर्चा के केंद्र में हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक नेता की राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि उस दौर की कहानी भी है जब बिहार की राजनीति में बाहुबल, गैंगवार, अपराध और चुनावी ताकत का असर काफी गहरा था।
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