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RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ा, 5.50% हुआ; तीन साल बाद बढ़ी ब्याज दर

RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ा, 5.50% हुआ; तीन साल बाद बढ़ी ब्याज दर


RBI Repo Rate Hike: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है. इसके साथ ही रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है. आपके दिए विवरण के मुताबिक, यह बढ़ोतरी करीब तीन साल बाद की गयी है. इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाया गया था.

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने MPC के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि बदलते मैक्रो-इकोनॉमिक और वित्तीय हालात, हालिया घटनाक्रम और भविष्य के अनुमानों का विस्तृत आकलन करने के बाद समिति ने रेपो रेट बढ़ाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया.

25 बेसिस पॉइंट बढ़ा रेपो रेट

MPC ने लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) के तहत पॉलिसी रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% करने का फैसला किया है.

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्प अवधि के लिए धन उपलब्ध कराता है. इसमें बदलाव का असर बैंकिंग सिस्टम के जरिए कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है.

SDF, MSF और बैंक रेट में भी बदलाव

रेपो रेट में बढ़ोतरी के साथ RBI ने अन्य संबंधित पॉलिसी रेट में भी बदलाव किया है. SDF रेट को समायोजित कर 5.25% किया गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट को 5.75% कर दिया गया है.

RBI MPC का फैसलानई दर
रेपो रेट5.50%
SDF रेट5.25%
MSF रेट5.75%
बैंक रेट5.75%

वेस्ट एशिया के तनाव और महंगाई पर नजर

RBI गवर्नर ने कहा कि MPC ने फैसला लेते समय बदलते वैश्विक और घरेलू आर्थिक हालात का आकलन किया. आपके दिए बयान के अनुसार, वेस्ट एशिया में तनाव और महंगाई से जुड़ी चिंताओं को भी फैसले के प्रमुख संदर्भों में रखा गया.

रेपो रेट में बढ़ोतरी का उद्देश्य मौद्रिक नीति के जरिए महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखना है.

तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ाने का फैसला

रेपो रेट में पिछली बढ़ोतरी फरवरी 2023 में हुई थी. इसके बाद लंबे समय तक RBI की मौद्रिक नीति में रेपो रेट को लेकर अलग-अलग चरणों में स्थिरता और बदलाव देखने को मिले.

अब 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.50% पर पहुंच गया है. इस फैसले से बैंकिंग सेक्टर और कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर इसके संभावित असर पर नजर रहेगी.

होम लोन और दूसरे कर्ज पर क्या असर पड़ सकता है?

रेपो रेट बढ़ने का असर बैंकों की फंडिंग लागत और उसके बाद कुछ तरह के लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है. खासकर फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज में ब्याज दर या EMI पर असर देखने को मिल सकता है.

हालांकि, किसी ग्राहक की EMI कितनी बढ़ेगी, यह उसके बैंक, लोन की राशि, ब्याज दर, बकाया अवधि और रीसेट नियमों पर निर्भर करेगा. इसलिए केवल RBI की 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के आधार पर हर कर्जदार की EMI में एक समान बदलाव नहीं माना जा सकता.

RBI MPC के फैसले पर बाजार की नजर

RBI के मौद्रिक नीति फैसले का असर बैंकिंग, कर्ज, निवेश और महंगाई से जुड़े बाजार संकेतकों पर भी पड़ सकता है. अब बाजार की नजर RBI के आगे के रुख और महंगाई-विकास से जुड़े उसके आकलन पर रहेगी.

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