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सारण शिक्षक सीट पर JDU-RLM आमने-सामने, उपेंद्र कुशवाहा की अपील के बाद भी 3 विधायक रामपुकार सिन्हा के साथ

सारण शिक्षक सीट पर JDU-RLM आमने-सामने, उपेंद्र कुशवाहा की अपील के बाद भी 3 विधायक रामपुकार सिन्हा के साथ


Saran Teacher MLC Election:
बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों पर चुनावी गतिविधियां तेज होने के साथ ही गठबंधन के भीतर की सियासत भी चर्चा में आ गई है. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में NDA के दो सहयोगी दलों से जुड़े नेताओं के आमने-सामने आने से राजनीतिक समीकरण दिलचस्प हो गया है.

NDA ने इस सीट से JDU के आनंद पुष्कर को अपना उम्मीदवार बनाया है. दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा भी सोमवार, 5 अक्टूबर को नामांकन दाखिल कर रहे हैं. खास बात यह है कि उनके नामांकन कार्यक्रम में RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह, प्रधान राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद और बाजपट्टी विधायक रामेश्वर महतो के शामिल होने की चर्चा है.


कुशवाहा की अपील के बाद भी RLM नेताओं की सक्रियता

सारण सीट को लेकर RLM की गतिविधि को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा पहले ही अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए रुख स्पष्ट कर चुके हैं.

उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा था कि विधान परिषद चुनाव में जिन सीटों पर BJP और JDU के उम्मीदवार NDA की ओर से मैदान में हैं, वहां RLM उनके समर्थन में मजबूती से खड़ी है. उन्होंने गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों के अलावा किसी अन्य सहयोगी के पक्ष में चुनावी गतिविधि को अनुशासनहीनता के दायरे में आने की बात कही थी.

इसके बाद भी RLM के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों का रामपुकार सिन्हा के नामांकन कार्यक्रम में पहुंचना पार्टी के भीतर मतभेद या अलग रणनीति की अटकलों को हवा दे रहा है.


सारण सीट पर पहले से RLM की नजर

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर RLM की दावेदारी अचानक सामने नहीं आई है. पार्टी की ओर से इस सीट के लिए रामपुकार सिन्हा के नाम पर प्रस्ताव पारित किए जाने की बात पहले से सामने आती रही है.

हालांकि NDA के भीतर सीट बंटवारे के स्तर पर अंततः JDU के आनंद पुष्कर को उम्मीदवार बनाया गया. इसके बाद भी रामपुकार सिन्हा का चुनाव मैदान में उतरना गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा करता दिख रहा है.

एक तरफ यह RLM की स्थानीय राजनीतिक दावेदारी के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इससे NDA के आधिकारिक उम्मीदवार को लेकर गठबंधन के अंदर एकरूपता पर सवाल उठ रहे हैं.

रामेश्वर महतो की पोस्ट से बढ़ी चर्चा

रामपुकार सिन्हा के नामांकन से पहले बाजपट्टी विधायक रामेश्वर महतो की सोशल मीडिया पोस्ट ने भी राजनीतिक चर्चा को तेज किया. उन्होंने संगठन, कार्यकर्ताओं के सम्मान और उनके साथ खड़े रहने की बात कही.

महतो ने यह भी बताया कि वह RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह और प्रधान राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद के साथ रामपुकार सिन्हा के नामांकन कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे.

हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में NDA के साथ पार्टी की प्रतिबद्धता भी साफ तौर पर दोहराई. इससे संकेत मिलता है कि RLM के भीतर सारण सीट को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग राजनीतिक सक्रियता जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन इसे फिलहाल NDA से अलग होने की औपचारिक कवायद नहीं माना जा सकता.

RLM के चार विधायक, तीन की नामांकन में मौजूदगी

बिहार विधानसभा में RLM के चार विधायक हैं. इनमें स्नेहलता, माधव आनंद, आलोक कुमार सिंह और रामेश्वर महतो शामिल हैं. रामपुकार सिन्हा के नामांकन कार्यक्रम में तीन विधायकों की मौजूदगी की बात सामने आ रही है, जबकि स्नेहलता कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी.

यही घटनाक्रम इस सवाल को जन्म दे रहा है कि क्या RLM नेतृत्व और पार्टी के कुछ विधायकों के बीच सारण शिक्षक सीट को लेकर रणनीति एक जैसी है या स्थानीय स्तर पर अलग राय बन रही है.

हालांकि पार्टी के शीर्ष नेताओं की ओर से NDA के साथ रहने की बात लगातार कही जा रही है. इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को फिलहाल गठबंधन टूटने या RLM के अलग रास्ते पर जाने के संकेत के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी.

मैदान में चार प्रमुख चेहरे

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला अब बहुकोणीय होता दिख रहा है. NDA की ओर से JDU के आनंद पुष्कर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि RLM से रामपुकार सिन्हा मैदान में हैं.

इसके अलावा जन सुराज ने निवर्तमान MLC अफाक अहमद को उम्मीदवार बनाया है, जबकि RJD की ओर से जयराम यादव चुनाव मैदान में हैं.

ऐसे में मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर की राजनीतिक पकड़ और स्थानीय संगठनात्मक प्रभाव की भी परीक्षा बनता दिखाई दे रहा है.

6 अक्टूबर तक नामांकन, 23 अक्टूबर को वोटिंग

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए नामांकन की प्रक्रिया 6 अक्टूबर तक चलेगी. 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे.

इस सीट के लिए 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी. नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह साफ होगा कि मैदान में कितने उम्मीदवार रहते हैं और गठबंधन के भीतर दिख रही यह राजनीतिक खींचतान चुनावी परिणामों पर कितना असर डालती है.

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