नेपाल बाढ़ पर प्रशांत किशोर का बड़ा हमला, बोले- बिहार में बाढ़ आना वैसा ही जैसे सूरज का पूरब से उगना
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और उसके बाद बिहार पर मंडराते खतरे के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है। बिहार में बाढ़ की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि राज्य में हर साल बाढ़ आना कोई नई बात नहीं है और सरकार इस समस्या पर केवल लीपापोती करती है।
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड के बाद बिहार के सीमावर्ती और नदी किनारे वाले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल की नदियों से आने वाले जलप्रवाह को देखते हुए बिहार में प्रशासन सतर्क है और प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।
‘बिहार में बाढ़ आना वैसे ही है जैसे सूरज का पूरब से उगना’
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए प्रशांत किशोर ने बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा,
“बिहार में बाढ़ आना वैसे है जैसे सूर्य रोज पूरब में उगता है।”
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में हर साल बाढ़ आती है और लाखों लोग इससे प्रभावित होते हैं। उनके मुताबिक, यह कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन इसके बावजूद इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
‘न सरकार को फर्क है, न लोगों को फर्क पड़ने वाला है’
प्रशांत किशोर ने कहा, “बिहार में बाढ़ हर साल आती है, लाखों लोग उससे प्रभावित होते हैं, हम तो चार साल से लगे हैं… ये कोई सवाल नहीं है कि बिहार में बाढ़ आई है… यहां न सरकार को न फर्क है, न लोगों को फर्क पड़ने वाला है।”
पीके से सवाल किया गया था कि क्या वह बाढ़ पीड़ितों से मिलने जाएंगे? इसी सवाल के जवाब में उन्होंने बिहार में बाढ़ को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी और सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े किए।
‘बाढ़ के नाम पर हर साल लीपापोती करती है सरकार’
नेपाल में बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान और लोगों की मौत की खबरों के बीच जब प्रशांत किशोर से बिहार पर संभावित असर को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सरकार हर साल बाढ़ के नाम पर केवल औपचारिक कार्रवाई करती है।
उन्होंने कहा, “ये कौन सी खबर है… सरकार हर साल बाढ़ के नाम पर लीपापोती करती है। फिर अगले साल बाढ़ आएगी।”
प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नेपाल में आई आपदा के बाद बिहार में भी नदी जलस्तर और संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।
नेपाल की तबाही के बाद बिहार में बढ़ी चिंता
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड से बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ में कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं। इस आपदा के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में भी एहतियाती सतर्कता बढ़ा दी गई है।
नेपाल से निकलने वाली कई नदियां भारत में प्रवेश करती हैं। नारायणी नदी भारत में गंडक नदी के नाम से आगे बढ़ती है, इसलिए नेपाल के ऊपरी क्षेत्रों में जलप्रवाह बढ़ने का असर बिहार के निचले इलाकों तक पहुंचने की आशंका रहती है।
बिहार में बाढ़ को लेकर पहले भी उठा चुके हैं सवाल
प्रशांत किशोर इससे पहले भी बिहार में बाढ़ और जल प्रबंधन को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने पूर्व में कहा था कि बिहार में बाढ़, जलजमाव और सूखे की समस्या को अलग-अलग नहीं, बल्कि समग्र जल प्रबंधन की योजना के जरिए देखना होगा।
इस बार नेपाल में आई तबाही के बाद पीके के ताजा बयान ने एक बार फिर बिहार की पुरानी बाढ़ समस्या और उसके स्थायी समाधान पर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
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