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बिहार पंचायत चुनाव पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, परिसीमन के बाद ही होगा चुनाव; बोले- मुखिया का चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण

बिहार पंचायत चुनाव पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, परिसीमन के बाद ही होगा चुनाव; बोले- मुखिया का चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण


Bihar Panchayat Election 2026: बिहार में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को बड़ा अपडेट दिया। पटना के होटल ताज में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर-5 : मुखिया संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पंचायतों का परिसीमन कराया जा रहा है और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अगला पंचायत चुनाव कराया जाएगा।

कार्यक्रम में पंचायतों की भूमिका, ग्रामीण विकास, स्थानीय शासन और पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों को गांवों के विकास की अहम कड़ी बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर विकास योजनाओं को लागू करने में मुखिया और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

सांसद-विधायक से ज्यादा चुनौतीपूर्ण मुखिया का चुनाव

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायत चुनाव की जमीनी प्रकृति का जिक्र करते हुए कहा कि सांसद या विधायक का चुनाव लड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव का स्तर नीचे आता है, चुनौती बढ़ती जाती है। वार्ड सदस्य और मुखिया का चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव सीधे गांव और स्थानीय समाज से जुड़ा होता है। उम्मीदवार को अपने गांव, टोले और स्थानीय मतदाताओं के बीच जाकर समर्थन हासिल करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने पंचायतों को लोकतंत्र की जमीनी इकाई बताते हुए स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका पर जोर दिया।

मुखिया के पास बड़ी जिम्मेदारी

सम्राट चौधरी ने कहा कि आम तौर पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को बड़ी शक्तियों वाला पद माना जाता है, लेकिन पंचायत स्तर पर मुखिया के पास बड़ी जिम्मेदारियां और व्यापक काम होते हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह रहने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि मुखिया, प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद के प्रतिनिधियों को अपनी पंचायत की ‘जीडीपी’ यानी विकास और आर्थिक गतिविधियों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए। इससे पंचायत के विकास कार्यों और स्थानीय संसाधनों की स्थिति को लेकर जनता के सामने अधिक पारदर्शिता आ सकती है।

पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गरीबों पर नया कर नहीं लगाया जाएगा, लेकिन गांवों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को राजस्व प्राप्त करने के प्रयास किए जाने चाहिए। इनमें ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और मोबाइल टावर जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पंचायतों की आय बढ़ने से कचरा प्रबंधन, पेयजल, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

पंचायतों में विकास योजनाओं पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को गति देने के लिए लगातार काम कर रही है। हाल ही में शुरू किए गए ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ के तहत पंचायतों में सार्वजनिक सुविधाओं और सरकारी परिसंपत्तियों को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने पंचायत स्तर के छोटे विकास कार्यों को 30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

इसके अलावा प्रत्येक ग्राम पंचायत में कई विकास योजनाओं पर काम करने की बात भी सामने आई है। इनमें विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

परिसीमन के बाद बदलेगा पंचायतों का स्वरूप

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अगला पंचायत चुनाव परिसीमन पूरा होने के बाद ही कराया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद पंचायत क्षेत्रों की सीमाओं और संरचना का निर्धारण किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अगले वर्ष नगर निकायों के परिसीमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पंचायत और नगर निकाय क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण हो सके।

गांवों के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की अहम भूमिका

‘ग्राम संसद बिहार चैप्टर-5’ के इस कार्यक्रम में ग्रामीण विकास और पंचायत शासन को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय नेतृत्व और अन्य संबंधित लोगों ने हिस्सा लिया। आयोजन का उद्देश्य पंचायत स्तर पर बेहतर शासन, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर संवाद को बढ़ावा देना था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों की मजबूती ही व्यापक विकास की आधारशिला है और पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाते हुए विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

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