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IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग केस: कब शुरू हुआ, क्या-क्या हुआ और अब आगे क्या?

IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग केस: कब शुरू हुआ, क्या-क्या हुआ और अब आगे क्या?

 


नई दिल्ली/पटना: IRCTC होटल टेंडर से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस करीब दो दशक पुराना मामला है। आरोपों का संबंध उस अवधि से है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि रेलवे के रांची और पुरी स्थित BNR होटलों के संचालन का ठेका देने में नियमों की अनदेखी की गई और इसके बदले पटना की जमीन के लेन-देन के जरिए कथित लाभ पहुंचाया गया।

2004-2009: यहीं से शुरू हुई कहानी

जांच एजेंसियों के मुताबिक, लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रांची और पुरी के BNR होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया।

इसके बाद जांच एजेंसियों ने इस टेंडर और पटना में जमीन के लेन-देन के बीच कथित संबंध का आरोप लगाया।

पटना की जमीन कैसे आई मामले में?

ED के आरोप के अनुसार, होटल टेंडर में कथित लाभ के बदले पटना में करीब तीन एकड़ जमीन एक बेनामी कंपनी के जरिए हासिल की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इस जमीन का संबंध लालू यादव के परिवार और उनसे जुड़े लोगों से था।

यही जमीन बाद में इस पूरे मामले में कथित quid pro quo यानी एक लाभ के बदले दूसरा लाभ वाले आरोप का अहम हिस्सा बन गई।

फिर CBI ने शुरू की जांच

मामले में पहले CBI की जांच सामने आई। इसके बाद CBI की प्राथमिकी को आधार बनाकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। ED ने आरोप लगाया कि होटल टेंडर से कथित तौर पर हासिल लाभ को जमीन के लेन-देन के जरिए आगे बढ़ाया गया।

मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल कैसे आया?

यही इस केस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ED का आरोप है कि होटल टेंडर में कथित अनियमितता से पैदा हुई अपराध की आय (proceeds of crime) को जमीन के लेन-देन के माध्यम से इस्तेमाल/स्थानांतरित किया गया। इसी आधार पर मामला Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत ED की जांच में आया।

ध्यान रहे कि ये जांच एजेंसियों के आरोप हैं, जिनका अंतिम फैसला ट्रायल के बाद अदालत करेगी।

2026 में क्या हुआ?

2026 में मामले में आरोप तय करने को लेकर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। मई में अदालत ने आरोप तय करने के फैसले को आगे के लिए टाल दिया था। इसके बाद सितंबर में मामले पर महत्वपूर्ण आदेश आया।

10 सितंबर 2026 का बड़ा आदेश

10 सितंबर 2026 को कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। वहीं सात आरोपियों को इस स्तर पर आरोपों से राहत मिली। अदालत ने आगे की कार्यवाही के लिए 3 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है।

कोर्ट की ताजा कार्रवाई का मतलब यह है कि अब मामला ट्रायल के अगले चरण में आगे बढ़ेगा। आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है; अभियोजन पक्ष को आगे अदालत में अपने आरोप साबित करने होंगे।

लालू परिवार के सामने अब क्या चुनौती?

अब सबसे बड़ी कानूनी चुनौती यह होगी कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेज, जमीन के लेन-देन, होटल टेंडर और कथित वित्तीय कड़ियों को अदालत के सामने कैसे साबित किया जाता है।

लालू परिवार की ओर से आरोपों का विरोध किया गया है। ऐसे में आगे गवाहों की गवाही, दस्तावेजी सबूत और बचाव पक्ष की दलीलें मामले की दिशा तय करेंगी।

एक नजर में पूरी टाइमलाइन

समयक्या हुआ
2004-2009लालू यादव रेल मंत्री रहे; BNR होटल टेंडर से जुड़े आरोप
इसके बादहोटल टेंडर और पटना की जमीन के बीच कथित संबंध की जांच
CBI जांचटेंडर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच
ED जांचCBI केस के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच
2026राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोप तय करने पर सुनवाई
10 सितंबर 2026लालू, राबड़ी, तेजस्वी समेत नौ के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश
3 अक्टूबर 2026अगली सुनवाई

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